रोशन मुस्तक़बिल ने किसानों के लिए उठाई आवाज़
पीछले सात महिनों से रूखी सूखी खाकर, गर्मी, सर्दी एंव बारिश बरदाश्त करते हुवे देश के अन्नदाता किसान एहतेजाज की चादर फैलाए अपना हक़ मांग रहै हैं। लेकिन सरकार पिछले सात महीनों से सुना अनसुना कर रही है।
पीछले सात महिनों से रूखी सूखी खाकर, गर्मी, सर्दी एंव बारिश बरदाश्त करते हुवे देश के अन्नदाता किसान एहतेजाज की चादर फैलाए अपना हक़ मांग रहै हैं। लेकिन सरकार पिछले सात महीनों से सुना अनसुना कर रही है।
آج کا انسان اپنی صحت کے بارے میں بہت فکر مند رہتا ہے اور اپنے فائدے کی چیزوں کا استعمال کرتاہے۔لیکن افسوس جہاں دنیا وی فائدے یا نفع ونقصان پر نظر رکھی جاتی ہے جو اچھی بات ہے،لیکن مذہبی نقطہ نظر سے حرام وحلال پربالکل توجہ نہیں دی جاتی